और किसी ढलते शाम मैं
हिम्मत जुटा ही लूंगा
कहने अलविदा तुम्हें,
मैं खुद को मना ही लूंगा

कर दूंगा आज़ाद तुम्हें
बेवक़्त पुकारों से
गिरह सारे खोल दूंगा
वक़्त के बहते धारों से

न आंसू,रुलाएंगे तुम्हें
न प्रेम,आंगन बुलाएंगे
मिले जो,राह फिर दोनों
फरेब ओढ़,मुस्कुराएंगे

तब तलक,तुम ढोये रखना
बिखरते सपनों की
इन पुरानी दीवारों को
मैं जुटा,फिर हिम्मत
नया दर्द कोई,पालूंगा

रहना,तुम खुशियों में खुश
मैं देख,तुम्हें मुस्कुरा लूंगा.. ❤💞

@Love_shayri👉💑👈