देखो लगते कितने सुंदर हैं पहाड़। शांत स्थिर न कोई इनमें है दहाड़ ।। घमंड नही ज़रा अपनी सुंदरता पर। मजबूती शान से खड़े अ…
समंदर ने सूरज पकड़ रखा है, ढल कर रुकी शाम भी सुनहरी हुई | शाखो के पत्ते शबनम न छोड़े, फिजा भी पहाड़ों की ठ…
जिदंगी के भी बहुत नखरे है जालिम कभी वो खुद से रुठता तो कभी दुसरो से कभी वो खुद से मानता तो कभी दुसरो के मनाने से। …
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