रात मिली सबेरा से, सबेरा बोला तुम क्यों आईं।
जब पहले ही बता दिए हम, न दे सिला ऐसा भी, जो
थोड़ा ठंडक पहली बार मिला, ओर बाद में तड़पता रहा।
तुझे बेवफ़ा कहूं या कुछ ओर, यूं ही काले जुल्फ
कमबख्त था दिल जो तुमसे इशारा करता रहा।
अब कभी भी गलती नहीं होगी इश्क़ के मोड़ पर।
कुंवारा क्यूं न रहना पड़े हमे, अपने आप से बाते बयां
तुझे रोशनी दी कुछ समझकर, फिर भी खफा होकर हो गई काली।
जितना मजा किए थे तेरे साथ, अब नहीं मिलेगा अलग होकर।
तुम जुगनू ओ से बाते करती है, हमसे मिलने न आईं,
मै तो आवारा हो गया, दिल लगा कर पहाड़ों से गुजर कर।
तुम झूठी थी, कह कर न कर पाई, निभाने की क्या बात है।
ये दुनिया रेशम की डोर में बंधी है, और तुम भी बंध
क्या हुआ? मौसम बना, बादल से बारिश हुई, आंधी आई उड़ गई।
नहीं करना था तब कह देती, न ही तुम शायरी बनती न शायर में।
तुमसे मिलने लाखों दीवाने आते हैं, जब तुम आधी
पहले प्यार को फंसाती है, तब खुद फंस जाती हैं। तुमसे प्यार करने से क्या फायदा, जो दूसरों के हो जाएं। मिलते तो हमें बहुत हैं, मै खुद करता नहीं आत्मा कहती हैं।
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